अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
तुम्हारा नाम आया और हम तकने लगे रस्ता
तुम्हारी याद आई और खिड़की खोल दी हम ने
- मुनव्वर राना
वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया
बस यही बात है अच्छी मिरे हरजाई की
- परवीन शाकिर
मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ
नज़र मिल गई दिल धड़कने लगा
- अकबर इलाहाबादी
तुझ को ख़बर नहीं मगर इक सादा-लौह को
बर्बाद कर दिया तिरे दो दिन के प्यार ने
- साहिर लुधियानवी
Urdu Poetry: मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे