अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
- जमाल एहसानी
बरस रही थी बारिश बाहर
और वो भीग रहा था मुझ में
- नज़ीर क़ैसर
लुत्फ़-ए-बहार कुछ नहीं गो है वही बहार
दिल ही उजड़ गया कि ज़माना उजड़ गया
- मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
जब से छूटा है गुलिस्ताँ हम से
रोज़ सुनते हैं बहार आई है
- जलील मानिकपुरी
वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
- आसी ग़ाज़ीपुरी
मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन
तुम्हें ख़ुद ए'तिबार आए न आए
- अख़्तर शीरानी
Urdu Poetry: मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं