Urdu Poetry: हमारी मुस्कुराहट पर न जाना

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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हमारी मुस्कुराहट पर न जाना
दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है
- आनिस मुईन

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जैसे पौ फट रही हो जंगल में
यूँ कोई मुस्कुराए जाता है
- अहमद मुश्ताक़

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मुस्कुराने की क्या ज़रूरत है
आप यूँ भी उदास लगते हैं
- अक़ील नोमानी

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ज़िंदगी बस मुस्कुरा के रह गई
क्यों हमें नाहक़ रिझा के रह गई
- नामी नादरी

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क़िस्मत के बाज़ार से बस इक चीज़ ही तो ले सकते थे
तुम ने ताज उठाया मैं ने 'ग़ालिब' का दीवान लिया
- सय्यद नसीर शाह

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वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
- परवीन शाकिर

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