अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
लेकिन अपना अपना दामन
- जिगर मुरादाबादी
अपने माथे की शिकन तुम से मिटाई न गई
अपनी तक़दीर के बल हम से निकाले न गए
- जलील मानिकपुरी
हर फ़िक्र सिर्फ़ जागने वाले का है नसीब
जो सो रहा है बस वही बंदा मज़े में है
- अन्जुमन मंसूरी आरज़ू
तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
- गुलज़ार
Urdu Poetry: तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ