Urdu Poetry: वो दिल ले के ख़ुश हैं मुझे ये ख़ुशी है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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वो दिल ले के ख़ुश हैं मुझे ये ख़ुशी है
कि पास उन के रहता हूँ मैं दूर हो कर
- जलील मानिकपुरी  

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ऐश ही ऐश है न सब ग़म है
ज़िंदगी इक हसीन संगम है
- अली जवाद ज़ैदी   

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कौन ताक़ों पे रहा कौन सर-ए-राहगुज़र
शहर के सारे चराग़ों को हवा जानती है
- अहमद फ़राज़  

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ज़िंदगी है अपने क़ब्ज़े में न अपने बस में मौत
आदमी मजबूर है और किस क़दर मजबूर है
- अहमद आमेठवी  

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हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़'
हमारे साथ है साया हमारा
- अहमद मुश्ताक़

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मुझे दुनिया के ता'नों पर कभी ग़ुस्सा नहीं आता
नदी की तह में जा के सारे पत्थर बैठ जाते हैं
- मुकेश आलम

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Urdu Poetry: हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की

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