Urdu Poetry: अजीब दर्द का रिश्ता है सारी दुनिया में

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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अजीब दर्द का रिश्ता है सारी दुनिया में
कहीं हो जलता मकाँ अपना घर लगे है मुझे
- मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद 

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नफ़रत के ख़ज़ाने में तो कुछ भी नहीं बाक़ी
थोड़ा सा गुज़ारे के लिए प्यार बचाएँ
- इरफ़ान सिद्दीक़ी 

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उस की भी मिरी तरह थी इक अपनी कहानी
उस को भी निभाना पड़ा किरदार मुझे भी
- शकील जाज़िब

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ख़ुदा से माँग जो कुछ माँगना है ऐ 'अकबर'
यही वो दर है कि ज़िल्लत नहीं सवाल के बा'द
- अकबर इलाहाबादी 

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Urdu Poetry: ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे

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