अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
- दुष्यंत कुमार
बना रहा हूँ मैं फ़ेहरिस्त छोटे लोगों की
मलाल ये कि बड़े नाम इस में आते हैं
- एजाज़ तवक्कल
शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गई
- फ़िराक़ गोरखपुरी
खो दिया तुम को तो हम पूछते फिरते हैं यही
जिस की तक़दीर बिगड़ जाए वो करता क्या है
- फ़िराक़ गोरखपुरी
Urdu Poetry: चलो तुम उधर को हवा हो जिधर की