अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा
मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता
- यगाना चंगेज़ी
लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है
- अमीर क़ज़लबाश
हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
हमीं को शम्अ जलाने का हौसला न हुआ
- क़ैसर-उल जाफ़री
मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ'नी
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को
- क़तील शिफ़ाई
Urdu Poetry: दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है