अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू न मिला
किसी को हम न मिले और हम को तू न मिला
- ज़फ़र इक़बाल
मुझ से बिगड़ गए तो रक़ीबों की बन गई
ग़ैरों में बट रहा है मिरा ए'तिबार आज
- अहमद हुसैन माइल
चाँद का हुस्न भी ज़मीन से है
चाँद पर चाँदनी नहीं होती
- इब्न-ए-सफ़ी
तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके
- नवाज़ देवबंदी
Urdu Poetry: तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या