अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
लम्हे उदास उदास फ़ज़ाएँ घुटी घुटी
दुनिया अगर यही है तो दुनिया से बच के चल
- शकील बदायूंनी
दुनिया तो है दुनिया कि वो दुश्मन है सदा की
सौ बार तिरे इश्क़ में हम ख़ुद से लड़े हैं
- जलील ’आली’
फ़लक पर उड़ते जाते बादलों को देखता हूँ मैं
हवा कहती है मुझ से ये तमाशा कैसा लगता है
- अब्दुल हमीद
ख़ुशी के फूल खिले थे तुम्हारे साथ कभी
फिर इस के बाद न आया बहार का मौसम
- सलाम संदेलवी
Urdu Poetry: कोई नग़्मा कोई पायल कोई झंकार नहीं