अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
- अहमद फ़राज़
मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा
उस को छुट्टी न मिले जिस को सबक़ याद रहे
- मीर ताहिर अली रिज़वी
राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
आगे आगे देखिए होता है क्या
- मीर तक़ी मीर
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
- दाग़ देहलवी
Urdu Poetry: जिस की अदा अदा पे हो इंसानियत को नाज़