अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
जिस की अदा अदा पे हो इंसानियत को नाज़
मिल जाए काश ऐसा बशर ढूँढ़ते हैं हम
- आजिज़ मातवी
इंसान का दिल क्या है दुनिया-ए-हवादिस में
टूटा हुआ तारा है टपका हुआ आँसू है
- सय्यद बशीर हुसैन बशीर
ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
- मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़म है आवारा अकेले में भटक जाता है
जिस जगह रहिए वहाँ मिलते-मिलाते रहिए
- निदा फ़ाज़ली
Urdu Poetry: हम जिस पे मर मिटे वो हमारा न हो सका