अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
अगर बदल न दिया आदमी ने दुनिया को
तो जान लो कि यहाँ आदमी की ख़ैर नहीं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
परेशानी अगर है तो परेशानी का हल भी है
परेशाँ-हाल रहने से परेशानी नहीं जाती
- अबरार अहमद काशिफ़
तुम्हें तो ठीक से बर्बाद करना भी नहीं आता
चलो पीछे हटो अपनी ये हालत मैं बनाता हूँ
- शब्बीर हसन
नहीं है मेरे मुक़द्दर में रौशनी न सही
ये खिड़की खोलो ज़रा सुब्ह की हवा ही लगे
- बशीर बद्र
Urdu Poetry: किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में