Urdu Poetry: ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
- निदा फ़ाज़ली

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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
- शकील आज़मी  

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प्यासो रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िर
मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े
- इक़बाल साजिद

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जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के
उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा
- आबिद अदीब

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Urdu Poetry: देखे हैं बहुत हम ने हंगामे मोहब्बत के

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