Urdu Poetry: तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
- जाँ निसार अख़्तर 

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कभी कभी तो छलक पड़ती हैं यूँही आँखें
उदास होने का कोई सबब नहीं होता
- बशीर बद्र 

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कोई इशारा दिलासा न कोई व'अदा मगर
जब आई शाम तिरा इंतिज़ार करने लगे
- वसीम बरेलवी 

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हमारे ऐब ने बे-ऐब कर दिया हम को
यही हुनर है कि कोई हुनर नहीं आता
- मिर्ज़ा रज़ा बर्क़ 

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