अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मिरी आह का तुम असर देख लेना
वो आएँगे थामे जिगर देख लेना
- जलील मानिकपुरी
दर्द उल्फ़त का न हो तो ज़िंदगी का क्या मज़ा
आह-ओ-ज़ारी ज़िंदगी है बे-क़रारी ज़िंदगी
- ग़ुलाम भीक नैरंग
खुली किताब थी फूलों-भरी ज़मीं मेरी
किताब मेरी थी रंग-ए-किताब उस का था
- वज़ीर आग़ा
रहने दे अपनी बंदगी ज़ाहिद
बे-मोहब्बत ख़ुदा नहीं मिलता
- मुबारक अज़ीमाबादी
Urdu Poetry: आ जाए न दिल आप का भी और किसी पर