Urdu Poetry: कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है
- गुलज़ार 

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गिरते हैं समुंदर में बड़े शौक़ से दरिया
लेकिन किसी दरिया में समुंदर नहीं गिरता
- क़तील शिफ़ाई 

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याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था
- नासिर काज़मी 

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सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का
जब उस ने वादा किया हम ने ए'तिबार किया
- जोश मलीहाबादी 

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Urdu Poetry: करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम

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