Urdu Poetry: ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
- शकील बदायूंनी  

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कितना है बद-नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में
- बहादुर शाह ज़फ़र

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'दाग़' को कौन देने वाला था
जो दिया ऐ ख़ुदा दिया तू ने
- दाग़ देहलवी

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घर में क्या आया कि मुझ को
दीवारों ने घेर लिया है
- मोहम्मद अल्वी

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