अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं ने
वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने
- जौन एलिया
'मीर' अमदन भी कोई मरता है
जान है तो जहान है प्यारे
- मीर तक़ी मीर
ज़िंदगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त
सोच लें और उदास हो जाएँ
- फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
- गुलज़ार
Urdu Poetry: रोने वालों से कहो उन का भी रोना रो लें