अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ये धूप तो हर रुख़ से परेशान करेगी
क्यूँ ढूँढ़ रहे हो किसी दीवार का साया
- अतहर नफ़ीस
तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
- साहिर लुधियानवी
अच्छी सूरत भी क्या बुरी शय है
जिस ने डाली बुरी नज़र डाली
- आलमगीर ख़ान कैफ़
भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे
हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं
- शकेब जलाली
Urdu Poetry: दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया