अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आहट भी अगर की तो तह-ए-ज़ात नहीं की
लफ़्ज़ों ने कई दिन से कोई बात नहीं की
- जावेद नासिर
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
- साहिर लुधियानवी
रात इक उजड़े मकाँ पर जा के जब आवाज़ दी
गूँज उट्ठे बाम-ओ-दर मेरी सदा के सामने
- मुनीर नियाज़ी
देवता बनने की हसरत में मुअल्लक़ हो गए
अब ज़रा नीचे उतरिए आदमी बन जाइए
- सलीम अहमद
Urdu Poetry: शाम को तेरा हँस कर मिलना दिन भर की उजरत होती है