अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
- जौन एलिया
मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता
- फ़िराक़ गोरखपुरी
इक सफ़ीना है तिरी याद अगर
इक समुंदर है मिरी तन्हाई
- अहमद नदीम क़ासमी
कोई तस्वीर मुकम्मल नहीं होने पाती
धूप देते हैं तो साया नहीं रहने देते
- अहमद मुश्ताक़
Urdu Poetry: आदमी आदमी से मिलता है, दिल मगर कम किसी से मिलता है