Urdu Poetry: पता अब तक नहीं बदला हमारा

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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पता अब तक नहीं बदला हमारा
वही घर है वही क़िस्सा हमारा
- अहमद मुश्ताक़  

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कोई भी घर में समझता न था मिरे दुख सुख
एक अजनबी की तरह मैं ख़ुद अपने घर में था
- राजेन्द्र मनचंदा बानी    

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दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते
- फ़ना निज़ामी कानपुरी  

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उन का ग़म उन का तसव्वुर उन की याद
कट रही है ज़िंदगी आराम से
- महशर इनायती

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तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता
वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता
- दाग़ देहलवी

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अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का
- असद अली ख़ान क़लक़

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Urdu Poetry: वो दिल ले के ख़ुश हैं मुझे ये ख़ुशी है

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