Urdu Poetry: किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में
मिरे नसीब में तुम भी नहीं ख़ुदा भी नहीं
- अख़्तर सईद ख़ान 

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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगर्ना ज़माने में क्या न था
- आज़ाद अंसारी 

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कितने ही ज़ख़्म हैं मिरे इक ज़ख़्म में छुपे
कितने ही तीर आने लगे इक निशान पर
- शकेब जलाली 

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धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
- राजेश रेड्डी

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Urdu Poetry: ये धूप तो हर रुख़ से परेशान करेगी

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