अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
- परवीन शाकिर
जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
- नासिर काज़मी
इश्क़ में कौन बता सकता है
किस ने किस से सच बोला है
- अहमद मुश्ताक़
एहसान-ए-रब मोहब्बतें इतनी मिलीं 'अदील'
इस उम्र-ए-मुख़्तसर में न लौटा सकेंगे हम
- अदील ज़ैदी
ख़्वाब होते हैं देखने के लिए
उन में जा कर मगर रहा न करो
- मुनीर नियाज़ी
ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे
- इमरान-उल-हक़ चौहान
Urdu Poetry: अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की