Urdu Poetry: करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाम
मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता
- ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर 

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वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता
- निदा फ़ाज़ली 

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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
- ख़ुमार बाराबंकवी

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दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद
अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद
- जिगर मुरादाबादी 

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Urdu Poetry: वो अगर तुझ से ख़फ़ा है तू ही जा मिल क्या हुआ

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