अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
- निदा फ़ाज़ली
एक सफ़र वो है जिस में
पाँव नहीं दिल थकता है
- अहमद फ़राज़
ये बात याद रखेंगे तलाशने वाले
जो उस सफ़र पे गए लौट कर नहीं आए
- आशुफ़्ता चंगेज़ी
दिन किसी तरह से कट जाएगा सड़कों पे 'शफ़क़'
शाम फिर आएगी हम शाम से घबराएँगे
- फ़ारूक़ शफ़क़
Urdu Poetry: अकेला हूँ मगर तन्हा नहीं हूँ