Urdu Poetry: पता अब तक नहीं बदला हमारा, वही घर है वही क़िस्सा हमारा

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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पता अब तक नहीं बदला हमारा
वही घर है वही क़िस्सा हमारा
- अहमद मुश्ताक़ 

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अंदर अंदर खोखले हो जाते हैं घर
जब दीवारों में पानी भर जाता है
- ज़ेब ग़ौरी 

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मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
- सईद राही

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होशियारी दिल-ए-नादान बहुत करता है
रंज कम सहता है एलान बहुत करता है
- इरफ़ान सिद्दीक़ी

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Urdu Poetry: बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग

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