Urdu Poetry: जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने
- शहरयार 

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तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके
- नवाज़ देवबंदी 

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तेरे ख़याल के दीवार-ओ-दर बनाते हैं
हम अपने घर में भी तेरा ही घर बनाते हैं
- जमीलुद्दीन आली 

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भीड़ तन्हाइयों का मेला है
आदमी आदमी अकेला है
- सबा अकबराबादी 

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Urdu Poetry: यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें

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