अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दिल ये इंसान का हर चीज़ से भर जाता है
क़द्र खो देता है हर वक़्त मयस्सर होना
- सय्यद मोहम्मद वक़ी
झूटे वादों पर थी अपनी ज़िंदगी
अब तो वो भी आसरा जाता रहा
- मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
इक तवज्जोह से उस की इस दिल में
मुद्दतों रौशनी सी रहती है
- अबू शब्बर
किया दर्द-ओ-ग़म ने मुझे ना-उमीद
कि मजनूँ को ये ही थीं बीमारियाँ
- मीर तक़ी मीर
धुँद ने छीन ली थी बीनाई
और हम थे दिए जलाते रहे
- दीपेश शर्मा सौभरि
मैं ने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख़्वाब की ताबीर बताने वाला
- अहमद फ़राज़
Urdu Poetry: अब किसी तरह दिल नहीं लगता