Urdu Poetry: हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया
- साहिर लुधियानवी 

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होते ही शाम जलने लगा याद का अलाव
आँसू सुनाने दुख की कहानी निकल पड़े
- इक़बाल साजिद

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ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में
- फ़िराक़ गोरखपुरी 

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यूँ ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर
जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
- जिगर मुरादाबादी 

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Urdu Poetry: ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

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