अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
- जौन एलिया
दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो
- अल्लामा इक़बाल
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उस से
वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला
- अहमद फ़राज़
यूँ ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर
जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
- जिगर मुरादाबादी
Urdu Poetry: दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है