अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए
- अब्दुल हमीद अदम
तेरी बातें ही सुनाने आए
दोस्त भी दिल ही दुखाने आए
- अहमद फ़राज़
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
- ख़्वाजा मीर दर्द
क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो
ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो
- मियाँ दाद ख़ां सय्याह
Urdu Poetry: ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह