अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे
- मिर्ज़ा ग़ालिब
रास आने लगी दुनिया तो कहा दिल ने कि जा
अब तुझे दर्द की दौलत नहीं मिलने वाली
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
इंक़लाब एक ख़्वाब है सो है
दिल की दुनिया ख़राब है सो है
- जौन एलिया
मिरी हस्ती है मिरी तर्ज़-ए-तमन्ना ऐ दोस्त
ख़ुद मैं फ़रियाद हूँ मेरी कोई फ़रियाद नहीं
- जिगर मुरादाबादी
Urdu Poetry: कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए