Urdu Poetry: ज़िंदगी आवाज़ है बातें करो बातें करो

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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मौत ख़ामोशी है चुप रहने से चुप लग जाएगी
ज़िंदगी आवाज़ है बातें करो बातें करो
- अहमद मुश्ताक़ 

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धीमे सुरों में कोई मधुर गीत छेड़िए
ठहरी हुई हवाओं में जादू बिखेरिए
- परवीन शाकिर 

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फूल की ख़ुशबू हवा की चाप शीशे की खनक
कौन सी शय है जो तेरी ख़ुश-बयानी में नहीं
- अज्ञात

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हाथ जिस को लगा नहीं सकता
उस को आवाज़ तो लगाने दो
- अम्मार इक़बाल 

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Urdu Poetry: मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है ख़मोशी भी है ये आवाज़ भी है

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