अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था
- नासिर काज़मी
दफ़्तर से मिल नहीं रही छुट्टी वगर्ना मैं
बारिश की एक बूँद न बे-कार जाने दूँ
- अज़हर फ़राग़
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
- निदा फ़ाज़ली
गुनगुनाती हुई आती हैं फ़लक से बूँदें
कोई बदली तिरी पाज़ेब से टकराई है
- क़तील शिफ़ाई
Urdu Poetry: लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे