Urdu Poetry: ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

Image Credit :

जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
- ज़फ़र सहबाई 

Image Credit :

खुली किताब थी फूलों-भरी ज़मीं मेरी
किताब मेरी थी रंग-ए-किताब उस का था
- वज़ीर आग़ा

Image Credit :

इश्क़ है जी का ज़ियाँ इश्क़ में रक्खा क्या है
दिल-ए-बर्बाद बता तेरी तमन्ना क्या है
- जुनैद हज़ीं लारी 

Image Credit :

'जमाल' हर शहर से है प्यारा वो शहर मुझ को
जहाँ से देखा था पहली बार आसमान मैं ने
- जमाल एहसानी 

Image Credit :

Urdu Poetry: इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के

Read Now