Urdu Poetry: आदमी आदमी से मिलता है, दिल मगर कम किसी से मिलता है

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली   

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आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
- जिगर मुरादाबादी 

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शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
- फ़िराक़ गोरखपुरी

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टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए
- सज्जाद बाक़र रिज़वी

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एक मुद्दत से न क़ासिद है न ख़त है न पयाम
अपने वा'दे को तो कर याद मुझे याद न कर
- जलाल मानिकपुरी

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Urdu Poetry: दीवाना बे-पढ़े-लिखे मशहूर हो गया

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