अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली
वो कौन था जो दिन के उजाले में खो गया
ये चाँद किस को ढूँढ़ने निकला है शाम से
- आदिल मंसूरी
आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो
इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़
- हफ़ीज़ जौनपुरी
ख़ुश-हाल घर शरीफ़ तबीअत सभी का दोस्त
वो शख़्स था ज़ियादा मगर आदमी था कम
- निदा फ़ाज़ली
क्या है जो हो गया हूँ मैं थोड़ा बहुत ख़राब
थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए
- जव्वाद शैख़
Urdu Poetry: आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे