Urdu Poetry: जिस्म की बात नहीं थी उन के दिल तक जाना था

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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जिस्म की बात नहीं थी उन के दिल तक जाना था
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है
- हस्तीमल हस्ती 

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ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में
तिरी याद आँखें दुखाने लगी
- आदिल मंसूरी 

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गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा
एक ही रंग है दुनिया को जिधर से देखा
- असअ'द बदायूंनी  

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देखो दुनिया है दिल है
अपनी अपनी मंज़िल है
- महबूब ख़िज़ां 

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