Urdu Poetry: कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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सो देख कर तिरे रुख़्सार ओ लब यक़ीं आया
कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी
- अहमद फ़राज़

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बहारों की नज़र में फूल और काँटे बराबर हैं
मोहब्बत क्या करेंगे दोस्त दुश्मन देखने वाले
- कलीम आजिज़ 

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सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं
- अहमद फ़राज़ 

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कुछ भी हों दिल्ली के कूचे
तुझ बिन मुझ को घर काटेगा
- मुज़फ़्फ़र हनफ़ी 

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