Urdu Poetry: कितने मतलब हैं बाज़ार शब्द के, जानें इन शेर के साथ

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

Image Credit :

दुनिया में हूँ दु निया का तलबगार नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ
- अकबर इलाहाबादी 

Image Credit :

औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा धुत्कार दिया
- साहिर लुधियानवी

Image Credit :

सुब्ह होते ही निकल आते हैं बाज़ार में लोग
गठरियाँ सर पे उठाए हुए ईमानों की
- अहमद नदीम क़ासमी 

Image Credit :

अक़्ल ये कहती है दुनिया मिलती है बाज़ार में
दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए
- जावेद अख़्तर

Image Credit :

Children's Day: बच्चों के लिए कहे गए शेर

Read Now