Urdu Poetry: वो सो रहा है ख़ुदा दूर आसमानों में

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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वो सो रहा है ख़ुदा दूर आसमानों में
फ़रिश्ते लोरियाँ गाते हैं उस के कानों में
- अब्दुर्रहीम नश्तर 

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भीड़ तन्हाइयों का मेला है 
आदमी आदमी अकेला है 
- सबा अकबराबादी 

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देवताओं का ख़ुदा से होगा काम
आदमी को आदमी दरकार है
- फ़िराक़ गोरखपुरी 

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क्या तिरे शहर के इंसान हैं पत्थर की तरह
कोई नग़्मा कोई पायल कोई झंकार नहीं
- कामिल बहज़ादी 

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Urdu Poetry: मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा

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