Urdu Shayari: बिछड़ गए महबूब के लिए शायरों के अल्फ़ाज़

अमर उजाला काव्य डेस्क

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दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा
यूँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे
-जौन एलिया

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वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो
- मोमिन ख़ाँ मोमिन

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दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
- नासिर काज़मी

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Urdu Poetry: तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं

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