Firaq Gorakhpuri Poetry: फ़िराक़ गोरखपुरी के चुनिंदा शेर
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
कोई समझे तो एक बात कहूँ
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं
मौत का भी इलाज हो शायद
ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता
Urdu Poetry: अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ