Urdu Poetry: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा 

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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है  

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वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे
शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने 

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जानता है कि वो न आएँगे
फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल 

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Urdu Poetry: इश्क़ भी खेल है नसीबों का ख़ाक हो जाएँ कीमिया हो जाएँ

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