अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
- हस्तीमल हस्ती
कब धूप चली शाम ढली किस को ख़बर है
इक उम्र से मैं अपने ही साए में खड़ा हूँ
- अख़्तर होशियारपुरी
तुम हमारे किसी तरह न हुए
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता
- मोमिन ख़ाँ मोमिन
ज़ोर क़िस्मत पे चल नहीं सकता
ख़ामुशी इख़्तियार करता हूँ
- अज़ीज़ हैदराबादी
Urdu Poetry: हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी