Urdu Poetry: तो वापस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यूँ नहीं आते

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

Image Credit :

जब आ जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मरकज़ पर
तो वापस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यूँ नहीं आते
- इबरत मछलीशहरी 

Image Credit :

रहता सुख़न से नाम क़यामत तलक है 'ज़ौक़'
औलाद से रहे यही दो पुश्त चार पुश्त
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

Image Credit :

उस का तो एक लफ़्ज़ भी हम को नहीं है याद
कल रात एक शेर कहा था जो ख़्वाब में
- कमाल अहमद सिद्दीक़ी

Image Credit :

वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
- महफूजुर्रहमान आदिल 

Image Credit :

Fathers Day 2024: पिता के लिए कहे शेर

Read Now