Urdu Poetry: आदतन तुम ने कर दिए वादे, आदतन हम ने ए'तिबार किया

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए'तिबार किया
- गुलज़ार    

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तिरे वादों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए
- फ़ना निज़ामी कानपुरी 

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हर-चंद एतबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
- जाँ निसार अख़्तर

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चाँद का हुस्न भी ज़मीन से है
चाँद पर चाँदनी नहीं होती
- इब्न-ए-सफ़ी

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Urdu Poetry: मौसम बहुत क़रीब है 'साहिल' चुनाव का

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