अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए'तिबार किया
- गुलज़ार
तिरे वादों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए
- फ़ना निज़ामी कानपुरी
चाँद का हुस्न भी ज़मीन से है
चाँद पर चाँदनी नहीं होती
- इब्न-ए-सफ़ी
Urdu Poetry: मौसम बहुत क़रीब है 'साहिल' चुनाव का