Urdu Poetry: उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
- जमाल एहसानी 

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मैं चुप कराता हूँ हर शब उमड़ती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है
- गुलज़ार 

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याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था
- नासिर काज़मी 

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दफ़्तर से मिल नहीं रही छुट्टी वगर्ना मैं
बारिश की एक बूँद न बे-कार जाने दूँ
- अज़हर फ़राग़ 

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Urdu Poetry: क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता

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